जब ब्राह्मण वैज्ञानिक ने कहा- खाना बनाती थी, भ्रष्ट हो गया धर्म !

मौसम विभाग की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने आज पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसके कुक यानी खाना बनाने वाले ने अपनी जाति छुपाकर उसका धर्म भ्रष्ट कर दिया है। पुणे पुलिस ने मौसम विभाग वैज्ञानिक मेधा खोले की शिकायत पर खोले की कुक निर्मला यादवके खिलाफ धोखाधड़ी’ का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा ब्राह्मण वैज्ञानिक के खिलाफ दर्ज होना चाहिए कि उसने जातीय आधार पर महिला कुक के सम्मान पर चोट पहुंचाई और मौलिक अधिकार का हनन किया, लेकिन यहां तो उल्टा ही हुआ।

जब ब्राह्मण वैज्ञानिक ने कहा- खाना बनाती थी, भ्रष्ट हो गया धर्म !

 

मौसम विभाग की वैज्ञानिक मेधा खोले ने पुलिस को बताया कि उसको घर के धार्मिक आयोजन में एक ब्राह्मण जाति का रसाईया चाहिए था और इसने खुद को ब्राह्मण बताकर मुझे धोखा दिया है।

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खोले के मुताबिक 2016 नौकरी की तलाश में निर्मला यादव उससे मिली। मुलाकात के दौरान उसने अपना नाम निर्मला कुलकर्णी बताया। महाराष्ट्र में कुलकर्णी ब्राह्मण जाति होती है। निर्मला ब्राह्मण है या नहीं, उसकी जांच के लिए मेधा 2016 में उसके घर भी गयीं। उसके बाद निर्मला त्योहारों या दूसरे आयोजनों पर खाना बनाने जाने लगीं।

 

लेकिन पिछले हफ्ते वैज्ञानिक महिला अधिकारी मेधा खोले को पता चला कि निर्मला यादव है तो वह आपे से बाहर हो गयीं। इस तथ्य को जांचने फिर एक बार वैज्ञानिक महिला पिछड़ी जाति की महिला के फिर एक बार घर गयीं।

वैज्ञानिक महिला का आरोप है कि जब वह निर्मला यादव के घर जाति जांच के लिए पहुंची तो उसने गालियां दीं और खदेड़ दिया।

पिछड़ी जाति की यादव महिला के हाथों का खाना खाकर भ्रष्ट हुए धर्म के अपराध में पुणे के सिनहद पुलिस स्टेशन की पुलिस ने ब्राह्मण महिला वैज्ञानिक मेधा खोले की ओर से धारा 419, 352 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जनज्वार की पूणे के सिंघड़ थाने में जब बात हुई तो पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कल ऐसा एक मुकदमा मेधा खोले की ओर दर्ज हुआ है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानूनी मजबूरियों के कारण हमने मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन असल पीड़ित वह महिला जिस पर पैसे वाली ब्राम्हण महिला ने मुकदमा दर्ज कराया है।

शिकायत के बाद जब पुलिस अधिकारियों ने सिंघड़ थाने पर निर्मला यादव को बुलाया तो पता चला कि मूल रूप से पूणे की ही रहने वाली 55 वर्षीय निर्मला पूणे के ही धायरी इलाके की झुग्गी बस्ती में रहती हैं। उनके पति गुजर चुके हैं और बच्चे साथ में नहीं रहते। वह घरों में चौका—बर्तन करके अपना पेट पालती हैं।

थाने में अपना पक्ष रखते हुए निर्मला ने पुलिस को बताया था कि उनको मेधा खोले के घर काम किसी के माध्यम से मिला था और उस वक्त जाति आदि की कोई बात नहीं हुई थी। निर्मला ने माना कि वह खोले के यहां कभी धार्मिक आयोजनों या अन्य अवसरों पर खाना बनाने जाती थी।

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