Thursday , 9 July 2020

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को सबसे बड़ी चुनौती देगा ऑस्ट्रेलिया

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दुनिया भर के देश अब चीन को घेरने लगे हैं, चाहे वह कोरोना वायरस की महामारी को लेकर हो या फिर उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीति. भारत के चीनी 59 ऐप बैन करने की कार्रवाई के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए एक नया ऐलान किया है.

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के कोरोना वायरस की महामारी की स्वतंत्र जांच की मांग करने के बाद से ही चीन-ऑस्ट्रेलिया के संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बुधवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया अगले 10 सालों में अपना रक्षा बजट 40 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ाएगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए लंबी मारक क्षमता वाले हथियारों की खरीदारी करेगा.

ऑस्ट्रेलिया के पीएम मॉरिसन ने कहा, ऑस्ट्रेलिया अगले 10 सालों में हवा, समुद्र और जमीन पर लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने वाले हथियारों को खरीदने के लिए 186 अरब डॉलर की धनराशि खर्च करेगा. ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को चुनौती देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी सेना का फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ही रखेगी. उन्होंने चीन का नाम लिए बगैर कहा, “हम हिंद प्रशांत क्षेत्र को दादागिरी और किसी एक के प्रभुत्व से मुक्त रखना चाहते हैं. हम इसे ऐसा इलाका बनाना चाहते हैं जहां सभी बड़े और छोटे देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रावधानों का पालन करते हुए एक-दूसरे के साथ मुक्त रूप से व्यापार कर सकें.”

मॉरिसन ने चीन का नाम भले नहीं लिया लेकिन हिंद-प्रशांत में सैन्य ताकत जाहिर करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ऑस्ट्रेलिया चीन के खिलाफ खुले तौर पर सामने आ गया है. वह चीन से निपटने के लिए अमेरिका पर भी निर्भर नहीं होना चाहता है.

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सिडनी के लोई इंस्टिट्यूट इंटरनेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के डायरेक्टर सैम रोजेवीन ने रॉयटर्स से कहा, “चीन एक ऐसी मुश्किल है जिसे झेल तो हर कोई रहा है लेकिन उसके खिलाफ कोई कुछ बोलना नहीं चाहता है. ये बिल्कुल सही फैसला है कि हम अपने क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें लेकिन जमीन से हमला करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें खरीदना चीन को पलटवार करने का न्योता दे सकता है.”

मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी नौसेना से सबसे पहले लंबी दूरी की 200 एंटी शिप मिसाइलें खरीदेगा. इसके अलावा, ध्वनि की तुलना में पांच गुना रफ्तार वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा.

ऑस्ट्रेलिया हथियारों की खरीदारी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी भी दूर कर सकता है. ट्रंप अपने सहयोगियों पर अमेरिका से मिलने वाली सुरक्षा को हल्के में लेने का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से चीन के साथ उसके संबंध और खराब होने की आशंका है. दोनों देशों के बीच पहले से ही प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है.

चीन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के कई उत्पादों के आयात पर रोक लगाकर या उन पर ड्यूटी बढ़ाकर ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने की कोशिश की थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया था कि आर्थिक नुकसान की धमकी देकर कोई उन्हें डरा नहीं सकता है.

ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में चीनी कंपनी हुवे को अपने 5जी ब्रॉडबैंड नेटवर्क से बाहर करके चीन को बड़ा झटका दिया था. पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि एक स्टेट-ऐक्टर ने सरकारी, राजनीतिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण ऑपरेटर्स की जानकारियां हैक करने की कोशिश की थी. रॉयटर्स ने तीन सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ऑस्ट्रेलिया का संदेह चीन पर ही है.

 

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