Monday , 22 October 2018

योगी सरकार ने बिल्डर्स पर नकेल कसने के लिए बनाएं नए कानून, अब बिल्डर्स नही कर सकेंगे धोखाधड़ी

आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अदद आशियाना चाहने वालों के हित में नया कानून बनाया है. राज्य की योगी सरकार ने बिल्डर्स पर नकेल कसने के लिए जो कानून बनाया है, उसके मुताबिक किसी भी बिल्डर को मकान की बुकिंग कराने से पहले ही लिखित रूप में देना होगा कि आखिरकार जब मकान मिलेगा तो ग्राहक को किस तरह की सुविधाएं दी जाएंगी.

इस नए कानून के बाद उत्तर प्रदेश में बिल्डर्स अब ग्राहकों से धोखाधड़ी नहीं कर सकेंगे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आम्रपाली ग्रुप पर सख्त रुख अपनाते हुए उसके 3 डायरेक्टरों को पुलिस हिरासत में लेने का आदेश दिया था. कोर्ट ने रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा नहीं करने और खरीददारों को फ्लैट नहीं देने पर आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ ये आदेश दिया था.

योगी सरकार द्धारा बनाए गए नए कानून के मुताबिक खरीदी जाने वाली संपत्ति की कीमत, सुविधाओं का ब्योरा, किसी भी तरीके का कानूनी दांव पेच, सारी जानकारियां बिल्डर्स को पहले ही देनी होगी. इन जानकारियों में बाद में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाया सकेगा.

खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने रेरा कानून के तहत बहुप्रतीक्षित द उत्तर प्रदेश रियल स्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट)(एग्रीमेंट फॉर सेल रूल्स) 2018 को मंजूरी दी है. अभी तक बिल्डर्स किसी भी प्रोजेक्ट के बारे में ग्राहकों को छोटी-मोटी जानकारियां ही देते थे जिनको बाद में वह अपनी सुविधानुसार बगैर किसी नोटिस के बदल भी देते थे.

कानून के कैबिनेट में पास होने के बाद बिल्डर की मनमानी रुकेगी और ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा. राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पहले रियल स्टेट में निवेश करने के बाद प्रमोटर की मनमानी शर्तों पर ही कार्य होते थे और खरीदारों के हितों की सुरक्षा नहीं होती थी.

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा नहीं करने और खरीददारों को फ्लैट नहीं देने पर आम्रपाली समूह के खिलाफ सख्त रुख  अपनाया था. शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह के 3 डायरेक्टरों को पुलिस हिरासत में लेने का आदेश दिया था.

मंगलवार(9 अक्टूबर) को जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की पीठ ने पुलिस को कोर्ट के अंदर बुलाया और आदेश दिया कि आम्रपाली समूह के डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा, शोव प्रिया और अजय कुमार को तब तक के लिए हिरासत में लिया जाए, जब तक वे फॉरेंसिक ऑडिट के पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा देते हैं.

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