Monday , 6 April 2020

फांसी की सजा संविधान के आर्टिकल 21, महात्मा गांधी के सिद्धांतों और प्राकृतिक अधिकारों के खिलाफ: निर्भया दोषियों के वकील ए.पी. सिंह

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निर्भया के दोषियों के फांसी के लिए कोर्ट ने सोमवार को तीसरी बार डेथ वारंट जारी करते हुए तीन मार्च की तारीख तय की है। अब कोर्ट के ताजा फैसले के अनुसार अब निर्भया के गुनहगारों को तीन मार्च को फांसी सुबह छह बजे दी जाएगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस बात पर चर्चा फिर से शुरू हो गई है कि क्‍या कोर्ट के इस बार जारी डेथ वारंट की तामील हो पाएगी? या इस बार भी निर्भया के गुनहगार कानूनी दाव पेंच का इस्‍तेमाल कर फांसी के फंदे से बचने में कामयाब हो जाएंगे।

कोर्ट के आदेश जारी करने के बाद दोनों पक्षों के वकील ने अपना अपना पक्ष मीडिया के सामने रखा। आइए जानते हैं इन गुनहगारों के पास क्‍या विकल्‍प हैं और वकीलों ने इस फैसले पर क्‍या प्रतिक्रिया दी है।

2012 निर्भया केस के दोषियों के वकील ए.पी. सिंह ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी बहुत विकल्प बाकी हैं। ये आप लोगों के द्वारा क्रिएट किया हुआ राजनीतिक दबाव है। मानवाधिकार के बहुत से लोग फांसी का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि फांसी की सजा संविधान, आर्टिकल 21, महात्मा गांधी के सिद्धांतों और प्राकृतिक अधिकारों के खिलाफ है।

इधर, निर्भया की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्भया के साथ देश की और बेटियां जो न्याय के इंतजार में हैं, उनको भी उम्मीद जगेगी देश की न्याय व्यवस्था पर। उनको भी न्याय मिल सकता है अगर निर्भया को न्याय मिल सकता है।

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2012 में दिल्‍ली ही नहीं देश को दहलाने वाली घटना पर दिल्ली की पटिलाया कोर्ट ने चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया। बता दें कि इस बार यह जारी डेथ वारंट तीसरा वारंट है। इससे पहले जारी दो वारंट में दोषियों को 22 जनवरी, एक फरवरी को फांसी देने का वक्‍त मुकरर्र किया गया था। अब ताजा फैसले के अनुसार उन्हें 3 मार्च सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी।

दोषियों को कोर्ट के आदेश के अनुसार तीन मार्च को सजा देने की तारीख मुकरर्र हुई है। हालांकि अभी उनके पास कुछ विकल्‍प मौजूद हैं। कुल चार दोषियों में तीन दोषियों ने अपने सारे विकल्‍प का इस्‍तेमाल कर दिया है। हालांकि एक दोषी पवन ने अभी अपने विकल्‍प को इस्‍तेमाल नहीं किया है।

पवन के पास दो विकल्‍प हैं। पहला वह क्‍यूरेटिव पिटिशन दाखिल कर सकता है वहीं दूसरा यह है कि वह राष्‍ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर सजा की माफी के लिए कह सकता है। इन दोनों विकल्‍प के खत्‍म होने के बाद ही उसके कानूनी विकल्‍प खत्‍म होंगे तब उसे फांसी दी जा सकती है। इससे पहले कोर्ट ने यह भी कहा है कि दोषियों को कानूनी विकल्‍प मौजूद रहने तक सजा नहीं दी जा सकती है।

पीड़िता निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि नया डेथ वारंट जारी हो गया है। इससे मैं बहुत खुश हूं। अब बस वो जारी की गई तारीख 3 मार्च को फांसी पर लटक जाएं।

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