Tuesday , 29 September 2020

दुखद: उत्तराखंड में कोरोना मरीजो की संख्या 30 हजार के पार पहुची अब तक 402 लोगो की हो चुकी मौत

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उत्तराखंड में कोरोना संक्रमित मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके कारण प्रदेश की संक्रमण दर 6.23 प्रतिशत पहुंच गई है। जो अब तक की सर्वाधिक संक्रमण दर है। सैंपल जांच के आधार पर प्रतिदिन संक्रमण का ग्राफ आगे बढ़ रहा है। वहीं, रिकवरी दर 66.03 प्रतिशत और डबलिंग दर 23.07 दिन पर आ गई है।

प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 30 हजार के पार हो गया है, जबकि मरने वालों की संख्या 402 हो गई है। वहीं, शनिवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा रिकॉर्ड 1115 संक्रमित मरीज मिले थे। जिसमें देहरादून में सबसे अधिक 290 कोरोना मरीज मिले।

हरिद्वार में 269, ऊधमसिंह नगर में 180, नैनीताल में 110, पिथौरागढ़ में 68, उत्तरकाशी में 51, टिहरी में 46, पौड़ी में 31, रुद्रप्रयाग में 25, चमोली में 14, बागेश्वर में 13, चंपावत में 10 और अल्मोड़ा जिले में आठ लोग कोरोना की चपेट में आए।

कोरोना संक्रमित मामले बढ़ने से सरकार ने इलाज के पर्याप्त इंतजाम किए हैं। प्रदेश भर में 413 कोविड केयर सेंटर बनाकर लगभग 30 हजार बेड की व्यवस्था की गई है। वहीं, बड़े निजी हास्पिटलों में गंभीर कोरोना मरीजों के उपचार के लिए आईसीयू बेड आरक्षित किए हैं।

संक्रमित मामले बढ़ने के साथ ही सक्रिय मरीज (एक्टिव केस) 9000 से अधिक हो गए हैं। हालांकि सक्रिय मरीजों की तुलना में प्रदेश में बेड की व्यवस्था तीन गुना अधिक ज्यादा है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में 481 आईसीयू बेड व वेंटीलेंटर, 1087 ऑक्सीजन युक्त बेड, 2206  आईसोलेशन बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा 413 कोविड केयर सेंटर में 30 हजार बेड बनाए गए हैं। जिलों में लगातार कोविड केयर सेंटरों की संख्या बढ़ाई जा रही है, जिससे कोरोना संक्रमण को लेकर आने वाली हर स्थिति से निपटा जा सके।

सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने बताया कि प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों के लिए पर्याप्त बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी जिला प्रशासन के माध्यम से आईसीयू बेड आरक्षित किए जा रहे हैं। प्रदेश में दवाईयां, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि  सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना और सैनिटाइज के नियमों का पालन कर सतर्क रहें।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के पांच छात्रों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जबकि दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक सर्जन समेत चार स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव आए हैं।

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कॉलेज के प्रिंसिपल डा. आशुतोष सयाना ने बताया कि 17 सितंबर से 2016 और 2017 बैच के छात्रों की परीक्षा है। इसके लिए छात्र दून आने लगे हैं। छात्र एंटीजन रिपोर्ट लेकर आए थे। कोरोना के लक्षण दिखने पर 45 छात्रों की जांच कराई गई, जिनमें से पांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

इसे देखते हुए हॉस्टल की एक विंग को सील कर सैनिटाइज कराया जा रहा है। छात्रों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि दून अस्पताल में एक सर्जन, दो स्टाफ नर्स और एक वार्ड की रिपोर्ट भी पॉजिटिव है।

स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने कहा कि सीमाओं पर बाहर से आने वाले सबके कोविड टेस्ट नहीं किए जाएंगे। उच्च कोरोना संक्रमण क्षेत्रों से आने वाले और होटल व होम स्टे में बुकिंग कराने वाले पर्यटकों को ही अपने खर्चे पर जांच की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी अपने जिले की सीमाओं में जांच की व्यवस्था करेंगे। इस सुविधाओं को शुरू करने में थोड़ा समय लगेगा। जांच के लिए टेंडर करने के साथ ही सीमा पर सैंपल लेने के लिए बूथ भी बनाया जाएगा।

सचिव ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट है कि पूर्व में हाई लोडेड शहर(उच्च संक्रमित क्षेत्र) और प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को आरटी-पीसीआर जांच की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य किया है था, लेकिन किसी कारण से चार दिन पहले की जांच रिपोर्ट या कोविड टेस्ट नहीं करा पाते हैं। उन्हें सरकार ने सीमा पर कोविड टेस्ट की सुविधा का निर्णय लिया है।

आदेश में व्यवस्था के लिए टाइम लाइन नहीं है। लेकिन इस सुविधा के लिए सीमाओं पर व्यवस्था बनाई जाएगी। कोविड टेस्ट के लिए निजी लैब को अधिकृत करने के लिए टेंडर किए जाएंगे। वहीं, सैंपल लेने के लिए अलग से बूथ की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर पहले से ही संदिग्ध लक्षणों के आधार पर एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं। एंटीजन टेस्ट भी सबके नहीं किए जा रहे हैं।

 

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