Tuesday , 18 June 2019

ऑक्सिजन लेने से रोजा टूट जाता है

रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर में नवां और सबसे पवित्र महीना माना गया है. इस दौरान बिना कुछ खाए पिए अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुजारते है. रमज़ान का माह हर मुस्लिम बंधु के लिए खास होता है. रमजान में रोजे रखने को लेकर कुछ नियम-कायदे होते हैं, जिनको निभाना हर मुसलामन का फर्ज है. रोजे के नियमों को लेकर कुछ सवालात हर व्‍यक्ति के जेहन में उठते हैं. उन्ही की बारे में आपको बताने जा रहे हैं.

सवाल: शब-ए-कद्र की क्या विशेषता है?
जवाब: शब-ए-कद्र की फजीलत तक कोई नही पहुंच सकता. इस रात की इबादत का सवाब हजार महीनों में मिलने वाले सवाब से अधिक है.

सवाल: क्या खुम्स की रकम स्कूल में दी जा सकती है?
जवाब: खुम्स की रकम के दो हिस्से होते हैं. एक हिस्सा सहमे सादात है, जो सिर्फ सैयद लोगों को दिया जाएगा. दूसरा हिस्सा सहमे इमाम है. इसे मदरसे में मस्जिद वगैरह में या फिर मुज्तहिद अगर किसी काम की इजाजत दें तो इस्तेमाल किया जा सकता है.

सवाल: कोई रोजादार तालाब या नदी में नहाए तो क्या उसका रोजा सही होगा?
जवाब: सिर को पानी में डुबाने से रोजा टूट जाएगा.

सवाल: क्या डायलिसिस करवाने से रोजा टूट जाएगा?
जवाब: जी नहीं, रोजा नहीं टूटेगा.

सवाल: क्या ऑक्सिजन लेने से रोजा टूट जाता है?
जवाब: ऑक्सिजन के साथ कोई दवा न मिली हो, तो नहीं टूटेगा.

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