Monday , 26 August 2019

 आज चिंतक और समाज सुधारक बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की 128वीं जयंती ,राष्ट्रपति कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि

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आज पूरा देश संविधान के निर्माता, चिंतक और समाज सुधारक बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की आज 128वीं जयंती मना रहा है. डॉ भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन् 1891 में मध्यप्रदेश के महू में हुआ था. रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई के घर जन्में डॉ. भीमराव आंबेडकर एक ऐसी जाति से ताल्लुक रखते थे, जिसे हिंदू समाज में अछूत माना जाता था. जिसके चलते उन्हें समाज में छुआ-छूत का सामना करना पड़ा. इस बात से उनके मन पर गहरा आघात पहुंचा और उन्होंने निश्चय कर लिया कि वह अपना जीवन ऊंच-नीच, भेदभाव और छूआछूत के उन्मूलन जैसे कार्यों के लिए समर्पित कर देंगे और समाज की सोच में सुधार लाकर रहेंगे.

पिता की सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र के सतारा चले गए, जहां उनकी मां की मृत्यु के बाद उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली और जाकर बॉम्बे में रहने लगे. यहां से डॉ भीमराव आंबेडकर ने अपनी पढ़ाई शुरू की और 15 साल की उम्र में 9 साल की रममाबाई से विवाह के बंधन में बंध गए. 1908 में 12वीं पास करने के बाद उन्होंने एफलिस्टन कॉलेज में एडमीशन लिया और राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि ली.

डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उ्हें श्रद्धांजली दी और संविधान के निर्माता को नमन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की है. वीडियो ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा कि ‘संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रणेता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर सादर नमन. जय भीम!’
डॉ बी.आर. आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। वे राष्ट्र के प्रतीक-पुरुष व संविधान शिल्पी थे। वे जातिगत एवं अन्य पूवाग्रहों से मुक्त भारत के निर्माण के लिए आजीवन संघर्षरत रहे। वे एक ऐसा समाज चाहते थे जहाँ महिलाओं व कमजोर वर्गों को समान अधिकार प्राप्त हों —राष्‍ट्रपति कोविन्‍द
वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा ‘डॉ बी.आर. आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि. वे राष्ट्र के प्रतीक-पुरुष व संविधान शिल्पी थे. वे जातिगत एवं अन्य पूवाग्रहों से मुक्त भारत के निर्माण के लिए आजीवन संघर्षरत रहे. वे एक ऐसा समाज चाहते थे जहाँ महिलाओं व कमजोर वर्गों को समान अधिकार प्राप्त हों —राष्‍ट्रपति कोविन्‍द’

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